दृश्यम की कार शिमला की बर्फ से ढकी सड़कों पर रफ्तार से आगे बढ़ रही थी। बाहर की हवा इतनी ठंडी थी कि कांच के पार भी उसकी तीखी चुभन महसूस की जा सकती थी मगर कार के अंदर की ख़ामोशी एक अलग ही कहानी बयां कर रही थी। ड्राइविंग सीट पर बैठा दृश्यम full on focus के साथ अपनी नज़रें सड़क पर जमाए ड्राइव कर रहा था। उसके चेहरे पर हमेशा की तरह zero expression थे जैसे उसे किसी चीज़ से कोई फर्क ही ना पड़ता हो लेकिन हक़ीक़त तो उसकी आँखें बयाँ कर रही थीं। वो बार-बार चुपके से रायशा की तरफ उठकर उतनी ही तेजी से वापस सड़क पर लौट आतीं मानो वो किसी चोरी को छुपाने की कोशिश कर रहा हो। वहीं रायशा पैसेंजर सीट पर बैठी खिड़की के बाहर नज़रें टिकाए पीछे छूटती वादियाँ, इमारतें, और हरियाली को बेहद गौर से देख रही थी।
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