गार्डन का माहौल इस वक्त इतना इंटेंस था कि मानो चारों तरफ बस उनकी ही कहानी लिखी जा रही हो। रात की ठंडी हवा हल्के हल्के पत्तों को हिला रही थी लेकिन रायशा का दिल इस कदर तेज धड़क रहा था कि उसकी अपनी ही धड़कन उसे सुनाई दे रही थी। झूले पर लेटी हुई रायशा के ऊपर झुका दृश्यम उसकी गर्दन पर अपने गर्म होंठों की लकीर छोड़ रहा था। उसकी सांसें रायशा की स्किन से टकरा कर उसे अंदर तक हिला दे रही थीं। उसके होंठ इतने सेडक्टिव और स्लो अंदाज में रायशा की गर्दन पर चल रहे थे कि रायशा चाहकर भी खुद को सिसकारी भरने से रोक नहीं पा रही थी।
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