शिमला की सर्द हवाओं में बारिश का मौसम अब भी थमा नहीं था। बाहर की सड़कों पर पानी की बूंदें लगातार टपक रही थीं, आसमान में ठंडक घुली हुई थी लेकिन उस ठंडक से भी ज़्यादा सर्द माहौल इस वक़्त दृश्यम के कमरे में पसरा था। कमरे की सारी लाइट्स बंद थीं। सिर्फ़ एक छोटी-सी डिम लाइट दीवार के कोने से अपना हल्का-सा उजाला बिखेर रही थी। हर टेबल, हर कोने, हर हिस्से पर सजी मोमबत्तियाँ अपनी धीमी-धीमी लौ से कमरे को ना सिर्फ़ रौशन कर रही थीं बल्कि एक अजीब-सी गर्माहट और रहस्यमयी खामोशी भी फैला रही थीं। मोमबत्तियों की टिमटिमाती रोशनी दीवारों पर परछाइयाँ बनाकर कमरे के सन्नाटे को और गहरा कर रही थी।
Whatsapp channel
Join whatsapp channel



Write a comment ...