वॉशरूम का माहौल ठंडी बूंदों से भीगा हुआ था, चारों तरफ दीवारों पर बहते पानी की आवाज़ गूंज रही थी लेकिन उस शोर के बीच भी जो सबसे ज्यादा गूंज रहा था वो था रायशा का टूटता हुआ सब्र और उसकी रूह से निकलती दर्द भरी सिसकियां। दीवार से टिकी हुई वो बार-बार खुद को संभालने की कोशिश कर रही थी लेकिन हर बार उसका जिस्म उसकी कमज़ोरी बयां कर देता। उसके आंसू उसके चेहरे पर ठंडे पानी के साथ मिलकर बह रहे थे और हर आंसू में उसका गुस्सा, उसका डर और उसकी लाचारगी समाई हुई थी। वही दूसरी तरफ दृश्यम था—जिसकी आंखों में चाहत से ज्यादा पज़ेशन और गुस्से की आग धधक रही थी। उसने उसे अपनी मजबूत बाहों में इस तरह कैद कर रखा था जैसे कोई शिकारी अपनी शिकार को पकड़कर अपने हक़ का ऐलान कर रहा हो।
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