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रिद्धि और रायशा की बहस

रूम का टेंपरेचर अचानक से इतना सर्द हो गया जैसे दीवारों पर जमी हवा भी थम गई हो और हर चीज़ एकदम खामोश हो गई हो दरवाज़े से आई उस आवाज़ ने पल भर में ही माहौल को जकड़ लिया आरव और रायशा दोनों हैरान रह गए रायशा ने फौरन अपनी नज़रें आरव से हटाकर पीछे देखा तो उसकी आंखें सीधे रिद्धि पर जाकर टिक गईं जो दरवाज़े के पास खड़ी थी उसके हाथ सीने पर कसकर बंधे थे और आंखों में ऐसी सख़्ती थी जैसे वो सिर्फ आंखों से ही सामने वाले को तोड़ देना चाहती हो

रिद्धि को अचानक यहां देखकर रायशा के चेहरे पर घबराहट और गुस्से की लकीरें खिंच गईं जबकि आरव की आंखें सिकुड़ गईं और उसने अपने पूरे रौब के साथ उसे सख़्ती से घूरते हुए तपाक से कहा_तुम यहां क्या कर रही हो स्कूल नहीं जाना तुम्हें..?

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alfariya Sheikh

A writer gives you wings to fly with his words