कमरे का माहौल इस वक्त किसी बर्फ़ीली वादी से भी ज्यादा सर्द था डिम लाइट की हल्की सी रोशनी पूरे कमरे में फैली हुई थी और उसके बीच रायशा बेड पर बैठी हुई बेतरतीब साँसें ले रही थी मानो उसके सीने में कोई तूफ़ान कैद हो।
उसके चेहरे पर थकान डर और गुस्से के मिले-जुले भाव साफ झलक रहे थे अचानक ही क्लिक की आवाज़ गूंजी और दरवाज़ा धीरे से खुला और दृश्यम अन्दर दाखिल हुआ दरवाज़े की आहट ने रायशा की धड़कनों को तेज कर दिया दृश्यम के कदम भारी लेकिन आत्मविश्वासी थे



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