इस वक्त रायशा बेड पर गिरी हुई थी उसके हाथ बेड पर टिके हुए कांप रहे थे चेहरे पर डर बेचैनी और घबराहट साफ झलक रही थी माथे से पसीने की बूंदे लुढ़क रही थीं और उसका सीना ऊपर-नीचे हो रहा था जैसे वो हवा के लिए तरस रही हो।
वो सहमी हुई आंखों से सामने खड़े दृश्यम को देख रही थी जिसकी नजरें इतनी इंटेंस थीं कि जैसे वो उसकी रूह तक को भेद रही हों दृश्यम ने धीरे-धीरे अपने शर्ट के बटन खोलने शुरू किए हर बटन के खुलने के साथ रायशा की बेचैनी और बढ़ती जा रही थी



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